बेसहारा बछड़े का क्षत-विक्षत शव मिलने से भारी रोष, जनप्रतिनिधियों का दिखा गैरजिम्मेदाराना रवैया

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ब्यूरो: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला की ग्राम पंचायत साहो में सर्द मौसम में बेसहारा पशुओं की बढ़ती संख्या चिंता का सबब बनती जा रही है। आए दिन यहां बेसहारा पशु खुले में घूमते नजर आते हैं। लेकिन स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों के गैरजिम्मेदाराना रवैये के चलते इन्हें कहीं भी सहारा नहीं मिल पा रहा।

सर्द मौसम की पहली बारिश में एक बैल को रेस्क्यू करके स्थानीय लोगों ने प्राथमिक उपचार मुहैया करवाया। वहीं स्थानीय पंचायत प्रधान की तरफ से सिर्फ आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया गया। एक के बाद एक बेसहारा पशु देखे जाने के बाद भी स्थानीय स्तर पर जागरूकता के अभाव के चलते अब तक इन्हें गौ सदन भिजवाने का प्रबंध नहीं हो पाया है।

वहीं गुरुवार सुबह दियूल गांव से सटे बगीचे में एक बछड़े को क्षत-विक्षत हालत में स्थानीय लोगों ने देखा, जिसके बाद कुछ युवाओं ने इसकी सूचना ग्राम प्रधान और सचिव को दी। अफसोस की बात यह है कि ग्राम पंचायत प्रधान को फोन करने पर उनका नंबर बार-बार व्यस्त रहा और मैसेज भेजने पर भी उसका कोई जवाब नहीं आया। हालांकि सचिव ने अपने स्तर पर समस्या को फोन पर सुना और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

शुक्रवार दोपहर बाद तक बछड़े को दफनाने के लिए ग्राम पंचायत की तरफ से कोई नुमाइंदा नहीं आया। इसके चलते मजबूरन युवाओं ने ही बछड़े के क्षत-विक्षत हिस्से को इकट्ठा करके उसे जमीन में दफनाया।

इस दौरान युवाओं ने मानवता का संदेश देते हुए साहो क्षेत्र में इस तरह की घटना होने पर काफी रोष जताया है। वहीं सर्द मौसम में खुले में घूम रहे बेसहारा पशुओं के लिए जल्द अस्थाई गौशाला निर्माण की मांग उठाई है। युवाओं ने बताया कि वह इस मांग को स्थानीय स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक पहुंचाएंगे ताकि फिर कोई बेसहारा पशु काल का ग्रास न बन पाए।ऐसे में यह सवाल उठता है कि जयराम सरकार के राज में गौ शालाएं और गौ सदन बनाने के लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। मगर जमीनी हकीकत देखनी है तो ग्राम पंचायत साहो की देखिए, यहां गौ सदन तो छोड़िए बेसहारा पशुओं के लिए गौ शाला बनाने के लिए सिर्फ हवा-हवाई बातें ही हुई हैं।