चंबा की ऐतिहासिक कला-संस्कृति को कितना जानते हैं आप, इस मुहिम से जुड़कर फैलाएं जागरूकता

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चंबा ब्यूरो: चंबा रियासत के समृद्ध इतिहास और कला-संस्कृति से युवा पीढ़ी को अवगत कराने के मकसद से चंबा रिडिस्कवर संस्था ने मुहिम छेड़ दी है। इसी कड़ी में ऐतिहासिक मिंजर मेले के शुभारंभ पर चंबा रिडिस्कवर संस्था की ओर से रियासत काल में पकाए जाने वाले पकवान बनाए गए। इस कार्यक्रम के सूत्रधार पदमश्री विजय शर्मा रहे। इनमें जरीस (मांसाहारी व्यंजन), गुच्छी का मदरा सहित अन्य पकवान बनाए गए।चंबा रिडिस्कवर संस्था के संयोजक सदस्य मनुज शर्मा ने बताया कि यह एक सामाजिक संस्था है। लोगों को अपनी संस्कृति के बारे में अधिक से अधिक जानकारी मिल सके। इसके लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। वहीं संस्था से जुड़े सारंग शर्मा ने बताया कि टाकरी लिपी से भी लोगों को रूबरू करवाया जा रहा है। लोगों को चंबा के पुराने व्यंजन बनाना सिखाए जाएंगे। मिंजर फ्लैग को लेकर सांस्कृतिक दौड़ भी करवाई जाएगी। इसमें द्रोणा संस्था के पांच सदस्य भाग लेंगे। साथ ही चंबा के पारंपरिक खेलों का भी आयोजन किया जाएगा। इनमें ज्ञान चोपड़, खिन्नु, ब्राग गिट्टी, चानण चप्पा, पिठु गरम, चोपड़, कोड़ी, दोड्डे, पेसे, अखरोट की खेलें, गाटे तथा बजिक, चखुंडी, हुड्डू, कंचे आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चंबा की संस्कृति काफी स्मृद्ध रही है। इसके बारे में आने वाली सभी पीढ़ियों को जानाकारी होनी आवश्यक है। यही कारण है कि चंबा रिडिस्कवर संस्था द्वारा लगातार इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। लोक गायक पियूषराज, पद्मश्री विजय शर्मा, पंकज चोफला, सागर शर्मा, सुरेंद्र ठाकुर, यशपाल, तुषार, विकास तथा मगनदीप ने कहा कि चंबा रिडिस्कवर संस्था द्वारा लोगों को यहां की पुरानी संस्कृति से अवगत करवाना मुख्य उद्देश्य है।