ऐसे ‘घूमंतु’ बनकर शर्मिंदा न करें, पिकनिक मनाने गए और गंदगी फैलाकर चले आए

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ब्यूरो: लॉकडाउन के बाद हिमाचल प्रदेश में रियायतें मिलना शुरू हुई तो लोग घरों से निकल कर सैर-सपाटे पर चल निकले। कुछ ऐसी ही बानगी इन दिनों ‘मिनी स्विटज़रलैंड’ खज्जियार में भी देखने को मिल रही है। मगर ये क्या यहां तो स्थानीय लोग ही पर्यटन की आड़ में गंदगी फैलाने पर तूले हुई है। ये तस्वीरें गवाह हैं हमारे अपने लोगों के जाहिलपन की, जिन्हें जितनी बार कोसा जाए उतना कम है।
चंबा जिला के मशहूर पर्यटन स्थलों में शुमार खज्जियार जैसे टूरिस्ट प्लेस में यूं खुले में गंदगी फैलाना कहां की समझदारी है। ठीक है कि आप अपने परिवार-दोस्तों के साथ घूमने आए हैं तो ज़रा उस छूट का यूं मजाक तो मत उड़ाइए, जिससे यहां की खूबसूरती पर दाग लग जाए।

आलम ये है कि यहां आने वाले स्थानीय पर्यटक गंदगी फैलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। खज्जियार को प्रकृति ने भले ही हरियाली और खूबसूरती से लबरेज किया है। मगर यहां इन दिनों जो गंदगी फैलाई जा रही है, उसे देखकर शायद कुदरत भी हैरान है कि अरे इंसान कम से कम यूं गंदगी तो मत फैलाओ।

खैर कुछ वक्त के लिए पर्यटन नगरी में बाहरी राज्यों के पर्यटकों की चहलकदमी थम गई है। लेकिन हमें उन सैलानियों से सीख लेने चाहिए, जो हिमाचल प्रदेश में आकर यहां की सादगी और सभ्याचार के कायल हो जाते हैं। हाल फिलहाल में ये गंदगी जो पसरी है, उसे देखकर हम सिर्फ इतना कहना चाहते हैं कि चकाचौंध भरी इस जिंदगी का यूं घमंड न करो, न जाने वक्त तुम्हें फिर उस मोड़ पर ला कर खड़ा कर दें, जिससे तुम कुछ साल पहले गुजरे हो।

बहरहाल हम भी आप सबसे अपील करते हैं कि आप कहीं भी घूमने जाएं तो वहां की खूबसूरती पर दाग लगाने की बजाय उसे संवारने में योगदान दें। वाकई में ये तस्वीरें देखकर हर किसी हिमाचली का सिर जरुर झुकेगा, जब कोई बाहरी राज्य से आया सैलानी यहां की गंदगी देखकर उन्हें ताने मारेगा। ऐसे माहौल में हमें संयम और अनुशासन का पालन करना चाहिए ताकि हम अपने वजूद, अपने सभ्याचार और अपनी पहचान को बरकरार रख सकें।
नोट: इस लेख का मकसद जागरूकता फैलाना है, किसी की भावना को आहत करना नहीं।

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